क्या बताऊ कितना मुश्किल है जीना
जिसके लिए जीना उस के बिना जीना
उसके दीदार को हर पल रोना
अब तो ये गुजारिश है मेरी तुझसे
चाहे मुझे तू वो प्यार न लौटा
बस मुझपे एक मुकदमा कर जा इसी बहाने
तारीख दर तारीख तेरा मुझे दीदार तो होता रहेगा
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