Wednesday, 13 May 2015

तुझे खो के

एक ज़माना वो भी था 
जब हर सुबह मुस्कुराते हुए होती थी
 लेकिन अब जाने कितने दिन
 बिना मुस्कुराए हर सुबह की शाम हो जाती है 
ऐसे सीखा तो  ना  हमने  हँस के न रो के
         जो सीखा बस तुझे खो के.………  

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