Sunday, 5 June 2016

कौन कहता है

कौन कहता है हम अकेले
 तेरी याद की बारात आज भी साथ है 
कौन कहता है  बेसूद है हम
 तेरी  सासों  की गर्मी का आज भी एहसास है
 कौन कहता है मदहोश हैं   हम 
तेरा चेहरा आज भी याद है 
कौन कहता है ख़त्म हो गई कहनी हमारी 
 मेरी आँखों में नमी है 
उनके दिल में मेरा दर्द है
मेरे इश्क़ का  जहा खामोश है
 पर आज भी आबाद है. 
 

Monday, 25 April 2016

वक़्त

कल तू दूर था ये दिल मगरूर था
 आज तू दूर है दिल मज़बूर है 
ये तो बस वक़्त का खेल है 
ना तेरी कोई खता न मेरा कोई कसूर  है 

Thursday, 7 April 2016

मालूम नहीं

तु था मेरे चेहरे की मुस्कराहट 
कब बन गया मेरी आँखो की नमी मालूम नहीं 
तु था मेरा हमसफ़र कब  बन गया बंजारा तेरी तलाश में मैँ मालूम नहीं 
कभी जगाई थी जीने की आस तुने कब जागा गया मीटने  की चाहत मालूम नहीं 
मालूम है तो बस इतना तेरा इंतजार आज भी  है
 आज भी  तुझ से क्यों प्यार है मालूम नहीं 

Thursday, 31 March 2016

क्यों कहता है दिल

 मेरे सपने वो अपने अरमानो के आगे तोड़ गया 
ना चाह के भी अंजना सा दर्द दे गया 
जब उनसे पूछा किसी ने कौन हु मैं 
वो हस के बोल गया,कोई खास नहीं 
अब वो  है मेरी बातो में शिकायत की जगह  
ना जाने फिर भी क्यों कहता है दिल 
 आज भी ये उनसे नाराज नहीं 

Sunday, 13 March 2016

अब तो बस ऐसे ही

दर्द की दास्ता इतनी सी है अब 
पहले बस दिल जलता था 
अब सीने से धुआ भी निकालता है 
हम अक्सर बाते करते है उससे भुलने की
 लेकिन आज भी उसकी यादे होटो पे ही सुलगती है.
अब तो बस ऐसे  ही ज़िंदगी चलती है 

Saturday, 6 February 2016

कर दे रेहमत

 मुस्कुराते है लब मेरे और 
आशू बस पलकों पर  होता है 
दूर किया तू ने उससे 
जो हर पल मेरी
दिल में बस्ता है  
अब तो कर दे अपने रेहम की बरसात  मुझ पर
 दर्द का एहसास मुझे भी होता है