तु था मेरे चेहरे की मुस्कराहट
कब बन गया मेरी आँखो की नमी मालूम नहीं
तु था मेरा हमसफ़र कब बन गया बंजारा तेरी तलाश में मैँ मालूम नहीं
कभी जगाई थी जीने की आस तुने कब जागा गया मीटने की चाहत मालूम नहीं
मालूम है तो बस इतना तेरा इंतजार आज भी है
आज भी तुझ से क्यों प्यार है मालूम नहीं
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