Tuesday, 14 July 2015

इश्क़ का फ़साना

धुंधली हो गई याद तेरी
 लेकिन फिर भी भुला नहीं पता कोई बात
तेरी
 वो तेरा हँसी, वो तेरा गुस्सा
  वो तेरा प्यार, वो तेरा दूर जा के सतना ,पास आ के मुझे तड़पना,
 वो तेरा हर एक बात पर मेरे सीने  से लग जाना
 वो तेरा बेवजह डर के मेरे हाथो को थामना
याद आता है, मुझे वो घंटो तेरी बचकानी बाते सुनना
याद आता है, मुझे तेरी बेवजह मुझे से दूर जाना
 मेरे पलकों पर गम के आशुओ का लाना
याद आता है मुझे, तेरा
मुझे इन जिंदगी के सफर में अकेला छोड़ जाना
भूले से भी न भूल पता हु तेरे मेरे इश्क़ का फ़साना

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