मेरा गम कभी होठो पर आया नहीं
बस आखों से बयां किया
कभी अपनो से कभी खुद से
सोचा जो अल्फाजो में बयां करू अपने गम को
मालूम हुए की अल्फाज कम पर जाएगे
आखों में ठहरे आंसू पलकों पर आ जाएगे
आखों की गहराई समन्दर से भी गहरी होती है
कही डूब न जाए ये जहा मेरे आंसू में
ये सोच कर अपना गम किसी को कभी बताया नहीं
कभी आंसू पलकों तक लाया नहीं
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