मेरे सपने वो अपने अरमानो के आगे तोड़ गया
ना चाह के भी अंजना सा दर्द दे गया
जब उनसे पूछा किसी ने कौन हु मैं
वो हस के बोल गया,कोई खास नहीं
अब वो है मेरी बातो में शिकायत की जगह
ना जाने फिर भी क्यों कहता है दिल
आज भी ये उनसे नाराज नहीं