Thursday, 31 March 2016

क्यों कहता है दिल

 मेरे सपने वो अपने अरमानो के आगे तोड़ गया 
ना चाह के भी अंजना सा दर्द दे गया 
जब उनसे पूछा किसी ने कौन हु मैं 
वो हस के बोल गया,कोई खास नहीं 
अब वो  है मेरी बातो में शिकायत की जगह  
ना जाने फिर भी क्यों कहता है दिल 
 आज भी ये उनसे नाराज नहीं 

Sunday, 13 March 2016

अब तो बस ऐसे ही

दर्द की दास्ता इतनी सी है अब 
पहले बस दिल जलता था 
अब सीने से धुआ भी निकालता है 
हम अक्सर बाते करते है उससे भुलने की
 लेकिन आज भी उसकी यादे होटो पे ही सुलगती है.
अब तो बस ऐसे  ही ज़िंदगी चलती है