खयालों में ही चलती है, कहानी तेरी मेरी
सवालो में होती है, बातें तेरी मेरी
दूर जा के, दर्द दे के बनती है
यादे याद करने को तेरी मेरी
खुद रोके सबको हंसा के बनती है कहनी तेरी मेरी
तुझे पा के खुद को खो के बनती है कहनी मेरी....................
Enter your comment...Ye kaun si wali kahani hai ji purani wali ya koi nayi?
ReplyDeletekahani to sab ki ek si hi hoti hai..chahe aapki ho ya hamari ya inki..
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