जाम बने तो मैख़ाने बने
राहे बनी तो मुसाफ़िर बने
मंजिले बनी तो लोगो के ठिकाने बने
कुछ तो खास बात है तुझमें
युहीं हम तो नहीं तेरे दीवाने बने
दिवानगी भी इस क़दर
जैसे नशा हो शराब का
बस मुसाफ़िर तेरी राहों का
मेरी मंजिल भी तू
मेरा ठिकाना भी तू
मेरी जिंदगी का किनारा भी तू ………।
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